जालौर दुर्ग

जालौर दुर्ग ( सुवर्ण गिरि दुर्ग ) :- यह दुर्ग मारवाड़ में सूकड़ी नदी के किनारे सुवर्णगिरि पहाड़ी पर स्थित है । डॉ . दशरथ शर्मा के अनुसार । प्रतिहार नरेश नागभट्ट प्रथम ने इस दुर्ग का निर्माण करवाया था । वीर कान्हड़देव सोनगरा और उसके पुत्र वीरमदेव | अलाउद्दीन खिलजी के साथ जालौर दुर्ग में युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए तथा 1311 - 12 ई . के लगभग खिलज | ने जालौर पर अधिकार किया । इस युद्ध का वर्णन कवि पद्मनाभ द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ ' कान्हड़दे प्रबंध ' तथा ' वीरमदेव | सोनगरा री बात ' में किया गया है ।
                   
जालौर दुर्ग
जालौर दुर्ग 

जालौर दुर्ग अपनी सुदृढ़ता के कारण संकटकाल में जहाँ मारवाड़ के राजाओं का आश्रय स्थल रहा वहीं इसमें राजकीय कोष भी रखा जाता रहा । संत मल्लिक शाह की दरगाह तथा दुर्ग में स्थित परमार | कालीन कीर्ति स्तम्भ , जैन धर्मावलम्बियों की आस्था का केन्द्र प्रसिद्ध ' स्वर्णगिरि ' मंदिर , तोपखाना आदि जालौर दुर्ग के | प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल हैं ।

जालौर दुर्ग
जालौर दुर्ग 


सोजत दुर्ग : यह जोधपुर और मेवाड़ के बीच ' नानी सीरड़ी ' नामक डूंगरी पर स्थित है । राव जोधा के पुज नौम्या | ने इसका निर्माण सन् 1460 के आसपास करवाया था ।